शुरुआती दौर के स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी क्या भूमिका अदा करती है?


शुरुआती दौर के स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी क्या भूमिका अदा करती है?

स्तन का कैंसर महिलाओं में काफी गंभीर समस्या मानी जाती है। वहीं इस तरह के कैंसर का शिकार ज्यादातर महिलाएं होती है। और तो और इस तरह के कैंसर का पता महिलाओं को भी नहीं लगता और जब ये काफी उभर जाती है, तब जाकर इस तरह की समस्या का पता उन्हें कुछ माइनो में लगता है। इसके अलावा हम आज के लेख में चर्चा करेंगे की आप कैसे मैमोग्राफी की मदद से स्तन कैंसर का पता लगा सकते है, क्युकि मैमोग्राफी एक ऐसी जाँच है जिसके बारे में महिलाओं को पता ही नहीं होता इसलिए आज के लेख के माध्यम से हम आपको मैमोग्राफी क्या है इसका चयन कब करना चाहिए और स्तन कैंसर के लिए ये कैसे वरदान साबित होती है इसके बारे में चर्चा करेंगे ;

स्तन कैंसर की जाँच में मैमोग्राफी कैसे एहम भूमिका निभाती है ?

  • स्तन कैंसर महिलाओं को होने वाला सबसे आम कैंसर के प्रकार में से एक है। स्तन कैंसर इतना गंभीर है कि महिलाओं को इसकी वजह से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें जान जाने का जोखिम भी शामिल है। 
  • स्तन कैंसर की पहचान और निदान के लिए मैमोग्राफी नामक एक विशेष जांच की जाती है। कहा जाता है कि एक उम्र के बाद महिलाओं को साल भर में एक से दो बार सामान्य रूप से मैमोग्राफी जांच करवानी चाहिए, क्योंकि महिलाएं स्तन कैंसर के जोखिम में ज्यादा रहती है। 
  • मैमोग्राफी की मदद से महिलाओं में जो स्तन कैंसर के ऊतक उभर रहें है, उसका निदान आसानी से किया जा सकता है। 

स्तन कैंसर के लक्षण क्या है ?

  • स्तन के आकार में परिवर्तन का आना। 
  • स्तन में कोई गांठ या मोटेपन की समस्या का आना। 
  • निप्पल पर या उसके आसपास लाली या दाने का आना। 
  • निप्पल से स्राव की समस्या। 
  • ब्रेस्ट या आर्मपिट में लगातार दर्द का होना। 
  • उलटा निप्पल या उसकी स्थिति या आकार में परिवर्तन का आना। 
  • त्वचा की बनावट में बदलाव का आना आदि।

मैमोग्राफी जाँच क्या है ?

  • मैमोग्राम स्तन की एक एक्स-रे तस्वीर है। स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों को देखने के लिए डॉक्टर मैमोग्राम या मैमोग्राफी का उपयोग करते है। नियमित मैमोग्राम सबसे अच्छे परीक्षण होते है, जिससे डॉक्टरों को स्तन कैंसर का जल्द पता लगता है, कभी-कभी इसे महसूस किए जाने से तीन साल पहले तक। यदि आप एक नया लक्षण विकसित करते है, जैसे कि गांठ, दर्द, निप्पल डिस्चार्ज या स्तन की त्वचा में परिवर्तन, तो किसी भी असामान्यता को देखने के लिए प्रदाता मैमोग्राफी का उपयोग कर सकते है। मैमोग्राफी को डायग्नोस्टिक मैमोग्राम भी कहा जाता है।
  • मैमोग्राम में अधिकांश निष्कर्ष सौम्य, या गैर-कैंसर वाले होते है। वास्तव में, 10 में से 1 से भी कम लोग जिन्हें मैमोग्राम के बाद अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता होती है, उन्हें कैंसर होता है।
  • यदि आपको स्तन कैंसर की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इसे जानने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट रेडियोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

मैमोग्राफी कितने प्रकार की है ?

मैमोग्राफी को मुख्यतः दो तरह से किया जाता है ;

  • 2डी में डिजिटल मैमोग्राफी :
  • डिजिटल मैमोग्राफी एक इलेक्ट्रॉनिक छवि प्रदान करती है, जिसे कंप्यूटर फ़ाइल के रूप में इकट्ठा किया जाता है। डिजिटल मैमोग्राफी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को फ़ाइल को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सहेजने और छवियों का अधिक आसानी से मूल्यांकन और साझा करने की अनुमति देती है। 
  • एक डिजिटल मैमोग्राम में आमतौर पर अलग-अलग कोणों पर लिए गए प्रत्येक स्तन की कम से कम दो तस्वीरें शामिल होती है। आमतौर पर ऊपर से नीचे और बगल से और एक 2डी दृश्य प्रदान करती है।

3डी में डिजिटल मैमोग्राफी :

3डी मैमोग्राफी, जिसे डिजिटल ब्रेस्ट टोमोसिंथेसिस (DBT) के रूप में भी जाना जाता है, जो एक नए प्रकार का मैमोग्राम है, जिसमें प्रत्येक स्तन को एक बार संकुचित किया जाता है और एक मशीन कई लो-डोज़ वाली एक्स-रे लेती है, क्योंकि यह आपके स्तन के ऊपर एक चाप में चलती है। एक कंप्यूटर तब छवियों को एक साथ रखता है, जो स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आपके स्तन के ऊतकों को तीन आयामों में अधिक स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देता है।

महिलाओं को मैमोग्राफी का सहारा किस उम्र में लेना चाहिए ?

  • वैसे तो हर उम्र की महिला स्तन कैंसर के जोखिम में होती है, लेकिन यह किशोरियों और युवतियों में इतना गंभीर नहीं है, जितना अधेड़ावस्था और वृद्धावस्था की महिलाओं को अपनी गिरफ्त में लेता है। इसलिए अक्सर डॉक्टर 40 साल की उम्र की महिलाओं को स्क्रीनिंग करवाने के लिए कहते है, क्योंकि स्क्रीनिंग मैमोग्राम स्तन कैंसर का जल्दी पता लगा सकता है और जितनी जल्दी कैंसर का पता चलेगा, उतनी ही जल्दी आपका उपचार शुरू किया जा सकता है। 
  • आपको बता दें कि 40 और 50 के दशक में महिलाओं के यादृच्छिक (सामान्य) परीक्षणों से पता चला है कि स्क्रीनिंग मैमोग्राम स्तन कैंसर से मरने के जोखिम को कम करता है। लेकिन एहम बात ये है की भारत में स्तन कैंसर का निदान करना आसान नहीं है, क्योंकि भारतीय महिलाएं, अपने स्वास्थ्य की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देती है और समस्याओं का घर पर ही उपचार करने का सोचती है। 
  • लेकिन कही न कही देखा जाए, तो उनके ऐसा करने के पीछे का एहम कारण जागरूकता में कमी भी हो सकती है। इसलिए अगर आप जानना चाहती है की मैमोग्राफी क्या है तो इसके लिए आपको ब्लॉग को अंत तक जरूर से पढ़ना चाहिए।

मैमोग्राफी जाँच की तैयारी कैसे करें ?

  • यदि आप स्तनपान करा रही है, और गर्भवती है या आपको लगता है कि आप गर्भवती हो सकती है, तो अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता या डॉक्टर को जरूर बताएं। जिससे वे आपको एक स्तन अल्ट्रासाउंड का सुझाव दे सकते है।
  • यदि आप मासिक धर्म का अनुभव करती है, तो कोशिश करें कि माहवारी आने से एक सप्ताह पहले या मासिक धर्म के दौरान अपना मैमोग्राम शेड्यूल न करें। इस दौरान आपके स्तन कोमल हो सकते है, जो प्रक्रिया को और अधिक असहज कर सकते है।
  • यदि आपके पास स्तन प्रत्यारोपण है या हाल ही में एक टीका लगाया गया है, तो शेड्यूलर को बताना सुनिश्चित करें।
  • वहीं मैमोग्राफी की जाँच वाले दिन आपको अपनी दिनचर्या का अच्छे से पालन करना है, जैसे – खूब खाएं-पिएं और अपनी सामान्य दवाइयां लेना ना भूले।
  • डिओडोरेंट, परफ्यूम, लोशन या बॉडी पाउडर न लगाए। ये उत्पाद एक्स-रे छवियों की सटीकता में बाधा बन सकते है।
  • कुछ लोग अपने मैमोग्राम के दिन ड्रेस के बजाय टॉप और बॉटम पहनना पसंद करते है। वहीं इमेजिंग प्रक्रिया के दौरान आपको अपनी कमर से ऊपर की ओर कपड़े उतारने होंगे। आपके पास पहनने के लिए बस एक मेडिकल गाउन या कपड़ा होगा। 

मैमोग्राफी में खर्चा कितना आता है ? 

  • लुधियाना में मैमोग्राफी का खर्च टेस्ट के प्रकार पर निर्भर करता है। वहीं बता दें की एक नियमित स्तन स्कैन की कीमत रुपये के बीच हो सकती है। एक नियमित स्तन स्कैन की कीमत 1,500 रुपये से 2,000 रुपये के बीच हो सकती है। 
  • जबकि डिजिटल मैमोग्राम की कीमत 8,000 रुपये तक हो सकती है। 

मैमोग्राफी जाँच के दौरान क्या होता है ?

  • आपको अपनी कमर के ऊपर के सभी कपड़े और गहने निकालने पड़ते है। और मौजूदा जांच करता आपको एक ओपन-फ्रंट हॉस्पिटल गाउन या ड्रेप पहनने के लिए देंगे।
  • जांच के दौरान आप एक मैमोग्राफी मशीन के सामने खड़े होंगे, और टेक्नोलॉजिस्ट आपको अपने गाउन से एक बार में एक ब्रेस्ट निकालने के लिए कहेंगे। और आप अपने ब्रेस्ट को ब्रेस्ट सपोर्ट प्लेट पर रखेंगी।
  • फिर टेक्नोलॉजिस्ट आपके ब्रेस्ट को सपोर्ट प्लेट से कंप्रेस करने के लिए प्लास्टिक पैडल को नीचे कर देंगे। संपीड़न की 3 से 5 सेकंड की अवधि के दौरान आपको कुछ असुविधा या दबाव महसूस हो सकता है। यदि आप दबाव को सहन करने में असमर्थ है, तो टेक्नोलॉजिस्ट को बताएं ताकि आपकी समस्या का समाधान हो सकें।  
  • संकुचित होने पर मशीन आपके स्तन का एक्स-रे लेगी।
  • यदि आपके दो स्तन है, तो आप इस प्रक्रिया को अपने दूसरे स्तन के लिए दोहराएंगे।
  • एक बार जब टेक्नोलॉजिस्ट मशीन से एक्स-रे ले लेते है, तो प्रक्रिया समाप्त हो जाती है। इसके बाद आप अपने कपड़े वापस पहन लेंगे और अपने परिवार के पास जा सकते है।

आप चाहें तो इस जाँच को कल्याण डायग्नोस्टिक्स हॉस्पिटल से भी किफायती दाम में करवा सकते है।

निष्कर्ष :

स्तन कैंसर का पता कैसे लगा सकते है इसके बारे में हम आपको उपरोक्त बता चुके है। और साथ ही मैमोग्राफी टेस्ट का चयन आपको कब करना चाहिए और लक्षण कैसे मददगार होते है स्तन कैंसर को जानने में इसके बारे में भी आपको हम उपरोक्त बता चुके है। पर ध्यान रहें इसके लक्षणों को कृपया नज़रअंदाज़ करने की कोशिश न करें वर्ना इसमें जान जाने का भी खतरा हो सकता है।

जानिए क्या है मैमोग्राफी और ये कैसे स्तन कैंसर मरीजों के लिए है वरदान ?

आज के समय की बात की जाए तो महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले काफी सुनने में आ रहें, वहीं ये कैंसर इतना खतरनाक होता है की इसके होने से महिलाओं की मौत तो निश्चित है। तो स्तन कैंसर से मरने वालों में से आधे से ज्यादा लोगों को इसका पता ही 3 या 4 स्टेज में चलता है, और इस स्टेज के मरीजों का इलाज मिलना काफी मुश्किल हो जाता है, पर आज हम मैमोग्राफी के बारे में आपको बताने जा रहें जिसका चयन करके आप स्तन कैंसर का पता आसानी से लगा सकते है ;

लक्षण क्या नज़र आते है स्तन कैंसर के ?

  • स्तन के आकार में परिवर्तन का आना। 
  • स्तन में कोई गांठ या इसका मोटा होना जैसा कुछ दिखाई देना। 
  • निप्पल पर या उसके आसपास लाली या दाने। 
  • निपल से स्राव का आना। 
  • ब्रेस्ट या आर्मपिट में लगातार दर्द का होना। 
  • उलटा निप्पल या उसकी स्थिति या आकार में परिवर्तन का आना। 
  • त्वचा की बनावट में बदलाव का आना।

क्या है मैमोग्राफी ?

  • मैमोग्राफी में महिलाओं के स्तनों की जांच और स्क्रीनिंग के लिए सबसे आम तकनीक है, विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जिनको स्तन कैंसर होता है या फिर होने का खतरा रहता है। 
  • यदि ब्रेस्ट में कोई गांठ हो या सूजन हो तो भी मैमोग्राफी जरूर कराएं। इसके अलावा उपरोक्त लक्षणों को जानकर आप मैमोग्राफी टेस्ट का चयन कर सकते है। 

पर ध्यान रहें मैमोग्राफी टेस्ट का चयन लुधियाना में बेस्ट रेडियोलॉजिस्ट से ही करवाए।

मैमोग्राफी के दौरान क्या होता है ?

  • मैमोग्राफी के दौरान एक सपाट एक्स-रे प्लेट पर दोनों स्तनों को सटाया जाता है। एक्स-रे में स्पष्ट इमेज हासिल करने के लिए स्तन को दबाने के लिए कम्प्रेशर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर चिकित्सक को कुछ ज्यादा जानकारी की जरूरत हो तो इस प्रक्रिया को कई बार किया जा सकता है। 
  • वहीं कई बार तो डिजिटल मैमोग्राफी भी की जाती है। ताकि यह एक्स रे इमेज को स्तन की इलेक्ट्राॅनिक पिक्चर्स में भेज सके।

मैमोग्राफी टेस्ट से पहले कौन-सी तैयारियां की जाती है !

  • इस प्रक्रिया के जरिये ब्रेस्ट कैंसर का निदान किया जाता है। यह एक एक्स-रे की तरह ही होता है, जिसका प्रयोग ब्रेस्ट कैंसर के निदान के लिए किया जाता है।
  • मैमोग्राफी के जरिये ब्रेस्ट के ऊतकों के इमेज को देख सकते है और इसके जरिए स्तन कैंसर की पहचान भी आसानी से की जाती है।
  • जिस दिन आपका मैमोग्राम होता है उस दिन पाउडर, लोशन, इत्र और क्रीम अपने ब्रेस्ट पर लगाने से बचें।
  • मैमोग्राफी के दौरान कुछ महिलाओं को बेचैनी हो सकती है, क्योंकि, मैमोग्राम के दौरान कुछ समय के लिए सांसों को रोकने के लिए कहा जा सकता है |
  • पीरियड्स के समय मैमोग्राफी की जाँच न कराएं।
  • यदि आपके ब्रेस्ट में कोमलता है, तो आप अपने डॉक्टर को बताये और उनसे जांच कराएं।
  • जब भी मैमोग्राम कराएं, तो उससे दो दिन पहले कैफीन का सेवन न करें।

मैमोग्राफी टेस्ट की लागत क्या है ?

  • लुधियाना में मैमोग्राफी टेस्ट का खर्च 1500 से 2000 रूपए तक आ सकता है।  
  • जबकि डिजिटल मैमोग्राम की कीमत 8,000 रुपये तक हो सकती है, लेकिन इस टेस्ट की कीमत निर्भर करती है की हॉस्पिटल और डॉक्टर का अनुभव कितना है और साथ ही हॉस्पिटल किस जगह पर स्थित है।

स्तन कैंसर से जुडी जटिलताएं क्या हो सकती है ?

  • चूंकि मैमोग्राफी एक एक्स-रे होता है, इसलिए आपके बाॅडी को काफी कम संख्या में रेडिएशन प्राप्त होगा। हालांकि इन रेडिएशन से जुड़ा जोखिम काफी कम होता है। 
  • यदि किसी गर्भवती महिला को तत्काल में मैमोग्राफी कराने की जरूरत पढ़ जाती है, तो उसे और उसके शिशु को किसी भी तरह के जोखिमों से बचाने के लिए उस महिला को इस टेस्ट के दौरान एक लीड एप्रन पहनाने की जरूरत होती है।
  • बाकी इस टेस्ट के किसी भी प्रकार का कोई भी जोखिम नहीं है, वहीं इस टेस्ट को करवाने से पहले डॉक्टर की बातों को जरूर ध्यान में रखें।

मैमोग्राफी का उद्देश्य क्या है ?

  • मैमोग्राफी के उद्देश्य में स्क्रीनिंग सबसे पहले की जाती है, इसके बाद यह स्तन में असामान्य परिवर्तन का पता लगा सकते है। 50 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी जांच कराने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के साथ अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते है। यदि किसी महिला को कोई समस्या होती है, तो इसके जरिए पता लगाया जाता है।
  • स्तन कैंसर या ट्यूमर के प्रारंभिक विकास और स्टेजों का पता लगाने के लिए यह परिक्षण लाभदायक होता है।
  • फाइब्रोएडीनोमा महिलाओं में एक मेडिकल स्थिति है, जो स्तन में गैर-कैंसरयुक्त गांठ का कारण बनती है। गैर-कैंसर वाली गांठ खतरनाक नहीं होती है और न ही इससे कोई बीमारी होती है, परन्तु इसका पता अवश्य लगाना चाहिए जो की मैमोग्राफी की मदद से लगाया जा सकता है।

सुझाव :

स्तन कैंसर का पता लगाना बहुत जरूरी है और ये पता आप मैमोग्राफी की मदद से लगा सकते है। वहीं आप चाहें तो मैमोग्राफी की जाँच को कल्याण डायग्नोस्टिक्स हॉस्पिटल से वाजिफ दाम में करवा सकते है। 

जानिए चेहरे का मेकअप कैसे MRI रिपोर्ट में लेकर आया कैंसर की समस्या को !

MRI जिसको हमारे शरीर के जाँच के लिए एक बहुत ही बढ़िया मशीन माना जाता है, इसकी मदद से आपके शरीर का अच्छे से जाँच किया जाता है। पर क्या आप जानते है की अगर आप इस जाँच को मेकअप लगा कर करवाने जाते है तो इसकी रिपोर्ट गलत भी आ जाती है, वहीं कुछ मामलों में तो मेकअप के बाद MRI को करवाने से कैंसर जैसे मामले भी सुनने को मिले है, तो चलिए जानते है की आपको MRI के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि जाँच के बाद आपकी रिपोर्ट गलत न आए ;

क्या है MRI जाँच ?

  • चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग यानि (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) एक चिकित्सा इमेजिंग तकनीक है जो कि आपके शरीर में अंगों और ऊतकों की विस्तृत छवियां बनाने के लिए चुंबकीय क्षेत्र और कंप्यूटर से उत्पन्न रेडियो तरंगों का उपयोग करती है। वहीं यह मशीन एक्स-रे का उपयोग नहीं करता है।
  • अधिकांश मामलों में हमने देखा है की एमआरआई मशीनें बड़ी, ट्यूब के आकार की चुम्बक होती है। जब आप MRI मशीन के अंदर लेटते है, तो चुंबकीय क्षेत्र अस्थायी रूप से आपके शरीर में पानी के अणुओं को पुन: संरेखित करने लगते है। 
  • इसके अलावा रेडियो तरंगें इन संरेखित परमाणुओं को बेहोश सिग्नल उत्पन्न करने का कारण बनती है, जिनका उपयोग क्रॉस-अनुभागीय एमआरआई छवियों को बनाने के लिए किया जाता है।

जानिए क्या है ओपन और कंट्रास्ट वाला एमआरआई (MRI) ?

  • ओपन MRI की बात करें तो ये एक खुला एमआरआई मशीन के प्रकार को संदर्भित करता है जो छवियों को लेता है। आम तौर पर, एक खुली एमआरआई मशीन में आपके ऊपर और नीचे दो फ्लैट मैग्नेट होते है, जिनके बीच में आपको लेटने के लिए एक बड़ी जगह होती है। यह दो तरफ खुली जगह की अनुमति देता है और क्लॉस्ट्रोफोबिया (claustrophobia) को कम करता है। 
  • फिर बात करें कंट्रास्ट MRI की जो कुछ एमआरआई परीक्षाएं कंट्रास्ट सामग्री के इंजेक्शन का उपयोग करती है। कंट्रास्ट एजेंट में गैडोलीनियम होता है, जो एक दुर्लभ पृथ्वी धातु है। और जब यह पदार्थ आपके शरीर में मौजूद होता है, तो यह आस-पास के पानी के अणुओं के चुंबकीय गुणों को बदल देता है, जिससे छवियों की गुणवत्ता बढ़ जाती है।

इन दोनों में से किसी भी MRI का चयन करने से पहले लुधियाना में MRI का खर्च कितना है, इसके बारे में जरूर जानकारी हासिल करें।

एमआरआई (MRI) जाँच से क्या पता चलता है ?

  • आपके मस्तिष्क और आसपास के तंत्रिका ऊतक का पता चलना।
  • आपकी छाती और पेट के अंग, जिसमें आपका हृदय, लीवर, पित्त पथ, गुर्दे, प्लीहा, आंत्र, अग्न्याशय और अधिवृक्क ग्रंथियां नज़र आती है।
  • स्तन के ऊतक का भी पता चलता है।
  • आपके रीढ़ की हड्डी में लगें चोट का भी इसके द्वारा पता चलता है।
  • आपके मूत्राशय और प्रजनन अंगों सहित श्रोणि अंग में विकार के बारे में भी इस टेस्ट के माध्यम से जानकारी आपको हासिल हो सकती है।
  • रक्त वाहिकाओं में परेशानी हो तो उसके बारे में भी इस टेस्ट के माध्यम से पता लगाया जा सकता है।
  • लसीकापर्व (प्रतिरक्षा प्रणाली के भाग) की भी जाँच की जा सकती है MRI की मदद से।

MRI जाँच से सही बीमारी का पता तभी लगाया जा सकता है, जब आप इस जाँच को लुधियाना में बेस्ट रेडिओलॉजिस्ट से करवाते है।

क्या MRI जाँच का चयन करने से व्यक्ति कैंसर की बीमारी से ग्रस्त हो जाता है ?

  • आपको बता दें कि एमआरआई एक दर्दरहित प्रोसिजर होता है, जिसमें 15 से 90 मिनट तक का समय आराम से लग जाता है। वहीं इस टेक्नॉलजी में शक्तिशाली चुंबकों, रेडियो वेव और एक कम्प्यूटर का इस्तेमाल होता है, जिससे शरीर के अंदर की पूरी जांच की जाती है। इसकी मदद से डॉक्टर घाव, रक्त की नसों में डैमेज, कैंसर या फिर दिल की बीमारियों का भी पता लगा सकते है।
  • जहां एक ओर डॉक्टर और लैब असिस्टेंट एमआरआई स्कैन से पहले मरीज के शरीर से मेटल हटाने के लिए कहते है, वहीं कभी-कभी वह चेहरे के मेकअप को नजरअंदाज कर देते है, जिसमें धातु तत्व होते है। जिस वजह से ही जांच रिपोर्ट गलत आ जाती है।
  • इसलिए जरूरी है की अगर आप MRI की जाँच करवाने जा रहें है तो ध्यान रहें की आपके शरीर में मेटल की कोई भी चीज न हो और न ही आपके चेहरे पर मेकअप लगा होना चाहिए। 
  • तो MRI से जाँच की रिपोर्ट कभी गलत नहीं आती, बस कुछ हमारे द्वारा और कुछ डॉक्टरों के द्वारा बातें ध्यान न होने की वजह से इसकी रिपोर्ट गलत आ जाती है। और घबराए न MRI की जाँच को करवा कर आप कैंसर पीड़ित नहीं हो सकते।

सुझाव :

एमआरआई (MRI) एक बहुत ही सुरक्षित और दर्द रहित जाँच है, जिसको करवाने से आप कैंसर पीड़ित नहीं होते, बल्कि ये आपके शरीर की समस्या के बारे में जाँच करते है और आपकी बीमारी को खुल कर सबके सामने लाते है।

वहीं अगर आप MRI की जाँच को सुरक्षित तरीके से करवाना चाहते है, तो इसके लिए आप कल्याण डायग्नोस्टिक्स हॉस्पिटल का चयन कर सकते है। 

निष्कर्ष :

MRI जाँच एक बहुत ही बेहतरीन जाँच प्रक्रिया है, जिसको करवा कर आप अपने शरीर में उत्पन्न हुई बीमारी का जड़ से खात्मा करने में काफी सहायक साबित होते है। इसके अलावा अफवाओं पर यकीन न करें की इस जाँच का चयन करने से व्यक्ति की समस्या और बढ़ सकती है, बल्कि इससे जुडी किसी भी तरह की समस्या का आपको सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको अनुभवी रेडिओलॉजिस्ट डॉक्टर के पास आना चाहिए।

जानिए एमआरआई (MRI) से हम कैसे स्तन कैंसर का पता लगा सकते है ?

एमआरआई (MRI) स्कैन एक ऐसे स्कैन की पद्यति में गिना जाता है, जिसकी मदद से हर बीमारी का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इसलिए तक़रीबन डॉक्टरों के द्वारा भी तरह की अंधरुनि समस्या होने पर इस स्कैन का चयन करने के लिए कहा जाता है। वहीं आज के लेख में जानेगे की हम कैसे स्कैन के माध्यम से स्तन कैंसर का पता लगा सकते है ;

महिलाओं में क्या है स्तन या ब्रेस्ट का कैंसर ?

  • महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में अगर समय रहते या समय से पहले इस बीमारी की पहचान हो जाए तो होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जा सकता है। 
  • वहीं काफी अनुसंधानकर्ताओं के द्वारा ये पता चला है की मरीजों के ब्रेस्ट में हेल्दी सेल्स यानी कोशिकाओं की तुलना कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं और गैर कैंसरकारी कोशिकाओं से की जाती है।
  • स्तन कैंसर, महिलाओं के स्तनों के अंदर विकसित होने वाला एक तरह का कैंसर है। जो आमतौर पर महिलाओं में आम है, लेकिन आजकल यह पुरुषों में भी हो सकता है। यह ज्यादातर मामलों में एक या एक से अधिक गांठों के रूप में भी शुरू होता है, जिसे स्तनों के अंदर महसूस किया जाता है। वहीं यह गांठें स्तन के ऊपरी या नीचे के हिस्सों में पाया जाता है।

एमआरआई (MRI) की मदद से महिलाओं के स्तन कैंसर का पता कैसे लगा सकते है ?

  • कैंसर एक घातक बीमारी है और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर या अन्य समस्याएं होना भी आजकल बहुत सामान्य होते जा रहा है। ब्रेस्ट कैंसर और ऐसे अन्य गंभीर रोगों का पता लगाने के लिए ब्रेस्ट का एमआरआई करवाया जाता है। इस स्कैन टेस्ट में कैंसर की पूरी स्थित यानी कौन-से स्टेज का कैंसर है ये पता चल जाता है। 
  • हम ये भी कह सकते है कि इस टेस्ट का प्रयोग उन महिलाओं में जिनमे कैंसर होने की संभावना बहुत अधिक होती है उनकी स्क्रीनिंग टूल के रूप में किया जाता है। ब्रेस्ट एमआरआई स्कैन में डॉक्टर को रोगी की ब्रेस्ट टिश्यू की साफ तस्वीर मिलती है, जिससे वो महिला में ब्रेस्ट कैंसर के बारे में अधिक सही से जान पाते है। 
  • ब्रेस्ट एमआरआई डॉक्टर को कैंसर के आकार और कैंसर कितना फैल चुका है, इन सब चीजों को माप कर कैंसर के चरण को निर्धारित करने में भी मदद मिलती है। 
  • ब्रेस्ट एमआरआई में किसी भी तरह की आयनीकृत रेडिएशंस का प्रयोग नहीं होता। डॉक्टर इनका प्रयोग महिलाओं में स्तन के ऊतकों का प्रशिक्षण करने के लिए करते है। जिनमें कैंसर का खतरा अधिक है उनमें इस बीमारी के शुरूआती लक्षण दिखाई देने लगते है। 
  • कैंसर चाहे किसी को भी हो सब में कुछ न कुछ लक्षण दिखाई जरूर देते है। इसलिए जरूरी है उन लक्षणों के नजर आते ही डॉक्टर से मिले। और स्तन कैंसर को अंदेखा न करें।
  • स्तन कैंसर का रिजल्ट बेहतर आए इसके लिए जरूरी है की सबसे पहले आप इस बीमारी की जाँच को लुधियाना में बेस्ट रेडियोलॉजिस्ट से जरूर करवाए।

स्तन कैंसर का चयन किन स्थितियों में किया जाता है ? 

  • कैंसर के निदान के बाद स्तनों में अतिरिक्त ट्यूमर या हानिकारक टिश्यू को खोजने के लिए।
  • 25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में स्तन ऊतक का पता लगाने के लिए।
  • हैवी टिश्यू की जांच करने के लिए।
  • मैमोग्राम या अल्ट्रासाउंड जैसे अन्य इमेजिंग परीक्षणों के परिणामों की पुष्टि करने के लिए।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन के ऊतकों का आकलन करना।
  • कीमोथिरेपी की प्रभावशीलता की जांच के लिए।
  • उन महिलाओं की जांच के लिए जिनकी पुनर्निर्माण सर्जरी हुई हो।
  • अधिकांश महिलाएं नियमित स्कैन के रूप में ब्रेस्ट एमआरआई से नहीं गुजरती है। जिन लोगों को ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। उन लोगों के लिए डॉक्टर ब्रेस्ट एमआरआई के साथ एक मैमोग्राम को शुरुआती जांच उपकरण के रूप में जोड़ सकते है। 
  • स्तन कैंसर का एमआरआई करवाने से पहले लुधियाना में MRI का खर्च कितना है, इसके बारे में जरूर जानकारी हासिल करें।

महिलाओं में स्तन कैंसर के क्या लक्षण है ?

  • स्तन या बाँह के नीचे गांठ या मोटापन जैसी समस्या का सामना करना। 
  • स्तन के आकार या आकृति में बदलाव का आना। 
  • स्तन की त्वचा में ढीलेपन या सिकुडेपन जैसी समस्या का सामना करना। 
  • स्तन नलिका से अधिक स्तन दूध के अलावा कुछ और निकलना। 
  • कंधे के नीचे गांठ जैसी सूजन का महसूस होना।
  • अगर आपको भी ऐसा महसूस हो या आपमें भी उपरोक्त लक्षण नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको कल्याण डायग्नोस्टिक हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए, लेकिन ध्यान रहें लक्षणों को कृपया नज़रअंदाज़ न करें।

सारांश :

इसके अलावा स्तन कैंसर में एमआरआई (MRI) क्या भूमिका निभाते है या ये कैसे महिलाओं के कैंसर को बाहर निकालने में मददगार साबित होते है, इसके बारे में हम इस छोटे से लेख में चर्चा कर चुके है। वहीं एमआरआई स्तन कैंसर ही नहीं बल्कि हर अंधरुनि बीमारी का पता करने में सहायक साबित होते है।