What Are Common Things Every Couple Notices in the First Ultrasound, and How Does It Feel?


What Are Common Things Every Couple Notices in the First Ultrasound, and How Does It Feel?

The feeling of seeing a baby for the first time after the news you heard of pregnancy is a special and unforgettable movement and comes along with many questions and curiosity, so in this article, you will learn about everything a couple of experiences in the first round of ultrasound is the pregnancy period. 

A common question is when you can go for an ultrasound scan? 

It can be different in the case of IVF ( In vitro fertilization ) of naturally conceiving as if your partner is conceiving naturally, and then you can go for a scan seven to eight weeks after you miss periods. 

But in the case of IVF, where the fertilization process takes place outside the body at a specialized IVF Centre . A female egg is delicately combined with male sperm, and the embryo is transferred to the woman’s body. So, after the embryo transfer, you can go for an ultrasound after five to six weeks.  

 

IVF is not an easy process. Before the procedure of IVF gets carried forward, the doctors need to check the abdomen part of the body internally as well, so Laparoscopy Surgery or in any other gynae hospital is performed to examine the body internally.  

Why is it important to perform an ultrasound during pregnancy? 

The Foremost reason to perform an ultrasound after a missed period is to confirm the pregnancy. And in the case of IVF, it is important to conduct in order to know the condition of the embryo as it adapts to the environment or not and also to determine if it is a twin or single baby is developing as in some rare care of IVF tree babies are also born. In that type of pregnancy, the baby and mother need proper care, so it is essential to consult the Gynaecologist on time.

What are the primary things that get noticed in the first ultrasound? 

  • You can hear the child’s heartbeat for the first time in your first ultrasound. 
  • It gives a proper report about the development and growth of the fetus. 
  • It can also detect complications in the pregnancy. 
  • In the IVF case, it also records the size and position of the embryo and placenta, as this plays a vital role. 
  • It also examines the condition of the other reproductive organs, like ovaries. Cervix and uterus.

A repeatedly asked question is how many times a prenatal ultrasound is needed to perform during the full span of pregnancy? 

If it is a natural pregnancy and you are not having any complications, then you only need to do it twice or three times every three to four months to ensure the child’s well-being. Pregnancies with complications need to be regularly kept intact with the condition as that can help doctors and midwives conduct safe deliveries at the time of delivery.  

 

जानिए क्या है मैमोग्राफी और ये कैसे स्तन कैंसर मरीजों के लिए है वरदान ?

आज के समय की बात की जाए तो महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले काफी सुनने में आ रहें, वहीं ये कैंसर इतना खतरनाक होता है की इसके होने से महिलाओं की मौत तो निश्चित है। तो स्तन कैंसर से मरने वालों में से आधे से ज्यादा लोगों को इसका पता ही 3 या 4 स्टेज में चलता है, और इस स्टेज के मरीजों का इलाज मिलना काफी मुश्किल हो जाता है, पर आज हम मैमोग्राफी के बारे में आपको बताने जा रहें जिसका चयन करके आप स्तन कैंसर का पता आसानी से लगा सकते है ;

लक्षण क्या नज़र आते है स्तन कैंसर के ?

  • स्तन के आकार में परिवर्तन का आना। 
  • स्तन में कोई गांठ या इसका मोटा होना जैसा कुछ दिखाई देना। 
  • निप्पल पर या उसके आसपास लाली या दाने। 
  • निपल से स्राव का आना। 
  • ब्रेस्ट या आर्मपिट में लगातार दर्द का होना। 
  • उलटा निप्पल या उसकी स्थिति या आकार में परिवर्तन का आना। 
  • त्वचा की बनावट में बदलाव का आना।

क्या है मैमोग्राफी ?

  • मैमोग्राफी में महिलाओं के स्तनों की जांच और स्क्रीनिंग के लिए सबसे आम तकनीक है, विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जिनको स्तन कैंसर होता है या फिर होने का खतरा रहता है। 
  • यदि ब्रेस्ट में कोई गांठ हो या सूजन हो तो भी मैमोग्राफी जरूर कराएं। इसके अलावा उपरोक्त लक्षणों को जानकर आप मैमोग्राफी टेस्ट का चयन कर सकते है। 

पर ध्यान रहें मैमोग्राफी टेस्ट का चयन लुधियाना में बेस्ट रेडियोलॉजिस्ट से ही करवाए।

मैमोग्राफी के दौरान क्या होता है ?

  • मैमोग्राफी के दौरान एक सपाट एक्स-रे प्लेट पर दोनों स्तनों को सटाया जाता है। एक्स-रे में स्पष्ट इमेज हासिल करने के लिए स्तन को दबाने के लिए कम्प्रेशर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर चिकित्सक को कुछ ज्यादा जानकारी की जरूरत हो तो इस प्रक्रिया को कई बार किया जा सकता है। 
  • वहीं कई बार तो डिजिटल मैमोग्राफी भी की जाती है। ताकि यह एक्स रे इमेज को स्तन की इलेक्ट्राॅनिक पिक्चर्स में भेज सके।

मैमोग्राफी टेस्ट से पहले कौन-सी तैयारियां की जाती है !

  • इस प्रक्रिया के जरिये ब्रेस्ट कैंसर का निदान किया जाता है। यह एक एक्स-रे की तरह ही होता है, जिसका प्रयोग ब्रेस्ट कैंसर के निदान के लिए किया जाता है।
  • मैमोग्राफी के जरिये ब्रेस्ट के ऊतकों के इमेज को देख सकते है और इसके जरिए स्तन कैंसर की पहचान भी आसानी से की जाती है।
  • जिस दिन आपका मैमोग्राम होता है उस दिन पाउडर, लोशन, इत्र और क्रीम अपने ब्रेस्ट पर लगाने से बचें।
  • मैमोग्राफी के दौरान कुछ महिलाओं को बेचैनी हो सकती है, क्योंकि, मैमोग्राम के दौरान कुछ समय के लिए सांसों को रोकने के लिए कहा जा सकता है |
  • पीरियड्स के समय मैमोग्राफी की जाँच न कराएं।
  • यदि आपके ब्रेस्ट में कोमलता है, तो आप अपने डॉक्टर को बताये और उनसे जांच कराएं।
  • जब भी मैमोग्राम कराएं, तो उससे दो दिन पहले कैफीन का सेवन न करें।

मैमोग्राफी टेस्ट की लागत क्या है ?

  • लुधियाना में मैमोग्राफी टेस्ट का खर्च 1500 से 2000 रूपए तक आ सकता है।  
  • जबकि डिजिटल मैमोग्राम की कीमत 8,000 रुपये तक हो सकती है, लेकिन इस टेस्ट की कीमत निर्भर करती है की हॉस्पिटल और डॉक्टर का अनुभव कितना है और साथ ही हॉस्पिटल किस जगह पर स्थित है।

स्तन कैंसर से जुडी जटिलताएं क्या हो सकती है ?

  • चूंकि मैमोग्राफी एक एक्स-रे होता है, इसलिए आपके बाॅडी को काफी कम संख्या में रेडिएशन प्राप्त होगा। हालांकि इन रेडिएशन से जुड़ा जोखिम काफी कम होता है। 
  • यदि किसी गर्भवती महिला को तत्काल में मैमोग्राफी कराने की जरूरत पढ़ जाती है, तो उसे और उसके शिशु को किसी भी तरह के जोखिमों से बचाने के लिए उस महिला को इस टेस्ट के दौरान एक लीड एप्रन पहनाने की जरूरत होती है।
  • बाकी इस टेस्ट के किसी भी प्रकार का कोई भी जोखिम नहीं है, वहीं इस टेस्ट को करवाने से पहले डॉक्टर की बातों को जरूर ध्यान में रखें।

मैमोग्राफी का उद्देश्य क्या है ?

  • मैमोग्राफी के उद्देश्य में स्क्रीनिंग सबसे पहले की जाती है, इसके बाद यह स्तन में असामान्य परिवर्तन का पता लगा सकते है। 50 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी जांच कराने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के साथ अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते है। यदि किसी महिला को कोई समस्या होती है, तो इसके जरिए पता लगाया जाता है।
  • स्तन कैंसर या ट्यूमर के प्रारंभिक विकास और स्टेजों का पता लगाने के लिए यह परिक्षण लाभदायक होता है।
  • फाइब्रोएडीनोमा महिलाओं में एक मेडिकल स्थिति है, जो स्तन में गैर-कैंसरयुक्त गांठ का कारण बनती है। गैर-कैंसर वाली गांठ खतरनाक नहीं होती है और न ही इससे कोई बीमारी होती है, परन्तु इसका पता अवश्य लगाना चाहिए जो की मैमोग्राफी की मदद से लगाया जा सकता है।

सुझाव :

स्तन कैंसर का पता लगाना बहुत जरूरी है और ये पता आप मैमोग्राफी की मदद से लगा सकते है। वहीं आप चाहें तो मैमोग्राफी की जाँच को कल्याण डायग्नोस्टिक्स हॉस्पिटल से वाजिफ दाम में करवा सकते है।